Childhood memories-बचपन की यादें

मानव जीवन का सबसे पहला अवस्था बचपन होता है।यकिन मानिए सबसे अच्छा, यादगार, खुशहाल समय यही होता है। बचपन में एक ऐसी सादगी होती है जो शायद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ये तय करना मुश्किल है कि बच्चों में भगवान होते हैं इसलिए वो जीवन के आनंद लेते हैं या फिर जीवन का आनंद लेते हैं जो भगवान होते हैं। लेकिन जो भी हो बड़ा ही यादगार होता है बचपन।

तो चलिए आज हम और आप खो जाते हैं उन हसीन पलों को याद करते हुए। याद किजीए आपके उन सुनहरे यादों को। भुल जाईए वर्तमान के सारे गम को बस आनंद लिजीए उन लम्हों का।

- याद किजीए उस घटना को, चाहें आप कहीं पर भी सो जाओ पर सुबह तो आंख बिस्तर पर ही खुलता था। हमें कुछ याद नहीं होता था, पर मजा बहुत आता था।
- सुबह से शाम तक कोई टेंशन नहीं होता था सिर्फ मस्ती मजाक और खेल कूद।
- उस वक्त घड़ी किसी के पास नहीं था पर समय सबके पास था। लेकिन आज सबके पास घड़ी है मगर समय किसी के पास नहीं है।
- उन दिनों की  बात ही कुछ और थी। तब के ‌एक दो रुपए आज के सैकड़ों रुपयों से ज्यादा खुशी देती थी।
- भाई बहन और दोस्तों के साथ बचपन के वो लुका-छिपी,चोर-पुलिस आदि सदाबहार हैं और रहेंगे।
- सोने से पहले दादा-दादी के काहानी बड़े मज़ेदार थे।लाईट चली गई है और आप ने अगर भूतों की कहानियां चर्चा नहीं की तो बचपन के एक बड़े अनमोल चीज को अपने गावा दिया।
- दोपहर में दोस्तों के साथ आम खाने जाना और नदी में नहाना । ये सब सच में दिल को सुकून देने वाले लम्हें हैं।

ये जींदेगी भी बड़ी अजीब है कल का ख्याव दिखा कर हमारा आज छीन  लेती है, ठीक उसी तरह जैसे जवानी का ख्याव दिखा कर हमारा बचपन छीन लिया।

लेकिन करें तो करें क्या ये याद ही है हमारे साथ जिसे रखना है जींदेगी भर याद।



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